पृथ्वीराज ने कहा कि फिल्मों का दायरा (स्केल) बढ़ने के बावजूद मलयालम फिल्म उद्योग की मूल रूप से अनौपचारिक (इन्फॉर्मल) कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया है। उनका मानना है कि यही अनौपचारिकता फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को ज़मीन से जोड़े रखती है।
अभिनेता और फिल्म निर्देशक पृथ्वीराज सुकुमारन ने इस बात पर चर्चा की कि बॉलीवुड, मलयालम सिनेमा से क्या सीख सकता है। उन्होंने कहा कि फिल्मों का दायरा काफी बड़ा होने के बावजूद, काम करने का सहज और सीधा तरीका मलयालम इंडस्ट्री की सबसे बड़ी ताकत है। अभिनेता-फिल्म निर्माता ने यह बातें मुंबई के ताज लैंड्स एंड में आयोजित ‘एक्सप्रेसो’ (Expresso) के 16वें संस्करण के दौरान कहीं।
जब द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के कार्यकारी निदेशक (Executive Director) अनंत गोयनका ने पृथ्वीराज से पूछा कि बॉलीवुड को मलयालम सिनेमा से क्या सीख लेनी चाहिए, तो अभिनेता ने कहा कि बिना किसी जटिल या अत्यधिक कागज़ी प्रक्रिया के काम करने का कल्चर ही इस इंडस्ट्री की पहचान है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि एक इंडस्ट्री के तौर पर हम बहुत सहज और अनौपचारिक हैं। बॉलीवुड की तुलना में हमारी कार्यशैली का बोझ काफी हल्का है।”
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