चंडीगढ़, 7 जनवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को गुरुग्राम में दो सत्रों में विभिन्न हितधारकों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठक में सार्थक चर्चा कर पेरेशवरों के सुझाव सुने। दूसरे सत्र में चार्टर्ड अकाउंटेंट, अधिवक्तागण, आर्किटेक्ट्स और पर्यावरणविदों, डॉक्टर सहित विभिन्न पेशेवर शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठकों में दिए गए सुझाव सहभागी लोकतंत्र, सहयोगात्मक शासन और साझा उत्तरदायित्व का प्रतीक है। इस जन भावना पर ही हरियाणा सरकार नीतियों और निर्णयों की नींव रखती है।
हितधारकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवर खुले मन, स्पष्ट सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ एक मंच पर एकत्र हुए हैं। समाज के प्रबुद्ध वर्ग से जुड़े होने के कारण नीति-निर्माण, विधिक परामर्श, वित्तीय अनुशासन, नियोजन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सुशासन की मजबूत इमारत इन्हीं मजबूत स्तंभों पर खड़ी होती है।
बीते वर्ष हितधारकों से मिले सुझाव के महत्व पर बात करते हुए श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जन हित में सुझाव बेहद व्यावहारिक रहे। उनमें दूरदर्शिता और भविष्य की जरूरतों की स्पष्ट झलक दिखाई दी। बीते वर्ष कुल 43 में से 15 सुझावों को बजट 2025-26 में शामिल भी किया गया। इन सुझावों के अंतर्गत वन टाइम सेटलमेंट योजना, ई.टी.ओ. द्वारा धारा-61 के तहत सुओ मोटो जांच, जी.एस.टी. अधिनियम 2017 की धारा-66 के अंतर्गत स्पेशल ऑडिट हेतु चार्टर्ड अकाउंटेंट पैनल का गठन, ई.टी.ओ. एवं डी.ई.टी.सी. कार्यालयों में पारदर्शिता हेतु सी.सी.टी.वी की व्यवस्था शामिल है। इनके अलावा, कृषि उपकरणों पर जी.एस.टी. में छूट, जी.एस.टी. रिफंड प्रक्रिया का स्वचालन, ई-वेस्ट प्रबंधन की नई नीति, अरावली जंगल सफारी जैसी पर्यावरणीय पहल, प्राणवायु देवता पेंशन योजना और पर्यावरण प्रशिक्षण केंद्र जैसे दूरगामी महत्व के निर्णय भी शामिल हैं। ये सभी निर्णय सरल कर प्रणाली, पारदर्शी प्रशासन, पर्यावरण संरक्षण और जनहित की दिशा में ठोस संकल्प का प्रमाण बने।











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