हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी अधिसूचित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) में की गई वृद्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सी.सी.ई.ए.) द्वारा लिया गया यह फैसला देश और प्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने तथा उन्हें उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विपणन सत्र 2027-28 के लिए अधिसूचित रबी फसलों के एम.एस.पी. में की गई यह वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई उस ऐतिहासिक घोषणा के अनुकूल है, जिसके तहत एम.एस.पी. को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना पर निर्धारित करने का संकल्प लिया गया था। उन्होंने बताया कि इस फैसले के तहत एम.एस.पी. में सबसे अधिक वृद्धि कुसुम के लिए 675 रुपये प्रति क्विंटल घोषित की गई है, जबकि रेपसीड और सरसों के लिए 413 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार मसूर के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल, जौ के लिए 136 रुपये प्रति क्विंटल, चने के लिए 83 रुपये प्रति क्विंटल और गेहूं के मूल्य में 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्पादन लागत पर मिलने वाला अनुमानित मार्जिन किसान-कल्याण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नई एम.एस.पी. दरों के अनुसार किसानों को गेहूं पर अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर 106 प्रतिशत का शानदार मार्जिन मिलेगा, जबकि सरसों और रेपसीड पर 96 प्रतिशत, मसूर पर 92 प्रतिशत, चने पर 59 प्रतिशत, जौ पर 58 प्रतिशत और कुसुम पर 50 प्रतिशत का मार्जिन सुनिश्चित किया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि हाल के वर्षों में केंद्र सरकार खाद्यान्न के अलावा दालों और तिलहन जैसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार उच्च एम.एस.पी. की पेशकश कर रही है। रबी की फसलों के इस बढ़े हुए एम.एस.पी. से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी और उन्हें लाभकारी मूल्य सुनिश्चित होगा, बल्कि इससे राज्य में फसल विविधीकरण को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि हरियाणा के किसान इन फैसलों से लाभान्वित होकर देश के अन्न भंडार को और समृद्ध करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे।
हरियाणा में पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश के खुलेंगे नए रास्ते, पीपीपी मॉडल पर विकसित होंगे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल – डॉ. अरविंद कुमार शर्मा
‘एसोचैम स्वरा राष्ट्रीय पर्यटन सम्मेलन’ में विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने रखा हरियाणा पर्यटन का रोडमैप
कहा, सरकार और निजी क्षेत्र की भागीदारी से बढ़ेंगी आधुनिक पर्यटक सुविधाएं, विरासत और पर्यावरण संरक्षण रहेगी सर्वोच्च प्राथमिकता
उद्यमियों से ‘सेवा संकल्प अभियान’ और ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ से जुड़ने की अपील, पर्यटन क्षेत्र के नए विचार भी आएं आगे
पर्यटन में 428 करोड़ घरेलू यात्राओं के बड़े बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की हरियाणा की तैयारी, दिल्ली-एनसीआर के साथ ग्रीन और ग्रामीण पर्यटन पर फोकस
चंडीगढ़, 30 सितंबर:
हरियाणा सरकार राज्य को देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में स्थापित करने के लिए पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश के नए रास्ते खोलने जा रही है। इसके तहत राज्य के चुनिंदा पर्यटन स्थलों और परिसरों को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। निजी क्षेत्र की पूंजी, विशेषज्ञता, तकनीक और बेहतर प्रबंधन क्षमता को सरकारी प्रयासों से जोड़कर पर्यटकों के लिए हरियाणा में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिसमें राज्य की ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
यह बात हरियाणा के सहकारिता, जेल, पर्यटन, विरासत एवं चुनाव मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘एसोचैम स्वरा राष्ट्रीय पर्यटन सम्मेलन’ में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने सम्मेलन में हरियाणा पर्यटन के विकास का रोडमैप पेश करते हुए कहा कि राज्य में पर्यटन को निवेश, रोजगार, इनोवेशन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर एक व्यापक विकास मॉडल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। सम्मेलन में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद थे।
पर्यटन बनेगा निवेश, रोजगार और स्थानीय विकास का मजबूत माध्यम – कैबिनेट मंत्री
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पर्यटन देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार बन रहा है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार पर्यटन को निवेश और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ते हुए इसे राज्य के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बनाने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में देश में लगभग 428.7 करोड़ घरेलू पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं। इतना बड़ा घरेलू पर्यटन बाजार हरियाणा के लिए व्यापक संभावनाएं लेकर आया है। दिल्ली-एनसीआर के विशाल बाजार से सीधा जुड़ाव, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय राजधानी के आसपास स्थित प्रमुख पर्यटन एवं विरासत स्थलों के कारण हरियाणा इस बाजार का लाभ उठाने की विशेष स्थिति में है।
पीपीपी मॉडल से बढ़ेंगी पर्यटन सुविधाएं:
पर्यटन मंत्री ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र के व्यापक विकास के लिए केवल सरकारी निवेश काफी नहीं है। निजी क्षेत्र की पूंजी, विशेषज्ञता, तकनीक, प्रबंधन क्षमता और नए विचारों को साथ लेकर आगे बढ़ना समय की मांग है। इसी उद्देश्य से राज्य के चुनिंदा पर्यटन स्थलों और परिसरों को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन पर्यटन स्थलों पर बेहतर आवास, खान-पान, आयोजन सुविधाएं, मनोरंजन, साहसिक गतिविधियां और पर्यटकों के लिए नए अनुभव विकसित किए जाएंगे। निजी निवेश को आकर्षित करते हुए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पर्यटन स्थलों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान सुरक्षित रहे।
उन्होंने होटल समूहों, टूर ऑपरेटरों, कार्यक्रम आयोजकों, तकनीकी कंपनियों, स्टार्टअप्स और स्थानीय उद्यमियों को हरियाणा के पर्यटन विकास में भागीदार बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र नए पर्यटन स्थलों और अनुभवों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
डॉ. अरविंद शर्मा ने सम्मेलन के मंच से उद्यमियों, नए उद्यमों (स्टार्टअप्स), युवाओं और नवाचार से जुड़े विशेषज्ञों को हरियाणा में चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने उद्यमियों, स्टार्टअप्स, नवाचार से जुड़े युवाओं और विशेषज्ञों से ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ में भागीदारी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यटन और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) क्षेत्र में तकनीक, पर्यटक सुविधाएं, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल सेवाओं और बेहतर पर्यटक अनुभव से जुड़े नवोन्मेषी विचार हरियाणा के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार केवल निवेश ही नहीं, बल्कि ऐसे नए विचार भी चाहती है जो आम नागरिकों और पर्यटकों की सुविधा भी बढ़ाएं। उद्योग जगत का अनुभव और युवाओं का नवाचार मिलकर पर्यटन क्षेत्र की चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान सामने ला सकते हैं।
डॉ. शर्मा ने कहा कि वर्ष 2023-24 में भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्यटन का योगदान लगभग 5.22 प्रतिशत रहा और इस क्षेत्र ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 8.46 करोड़ रोजगार उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि हरियाणा में भी पर्यटन को केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से होटल और रेस्टोरेंटों के साथ-साथ टैक्सी चालकों, गाइडों, दुकानदारों, किसानों, शिल्पकारों और स्थानीय युवाओं के लिए भी आय और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
मोरनी से टिक्कर ताल तक ग्रीन टूरिज्म पर विशेष जोर:
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि हरियाणा में पर्यटन विकास को पर्यावरण संरक्षण के साथ आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मोरनी की पहाड़ियों, टिक्कर ताल, हथनीकुंड बैराज, तिलयार झील सहित राज्य के अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों में पर्यावरण आधारित पर्यटन (इको-टूरिज्म) और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यटन का विकास प्रकृति की कीमत पर नहीं हो सकता। हमें ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिसमें सुविधाएं और पर्यटक बढ़ें, लेकिन हरियाली, प्राकृतिक संसाधन और स्थानीय पहचान भी सुरक्षित रहें।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के हरित (ग्रीन) पर्यटन मॉडल में गांवों और खेतों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। सितंबर 2026 तक राज्य में 38 पंजीकृत फार्म टूरिज्म स्थल और 11 पंजीकृत होम-स्टे हैं। फार्म टूरिज्म के माध्यम से पर्यटकों को खेती, ग्रामीण जीवन, हरियाणवी खान-पान, लोक संस्कृति और पारंपरिक आतिथ्य से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के स्रोत मिल रहे हैं और ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन से होने वाला आर्थिक लाभ केवल बड़े पर्यटन केंद्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांवों और स्थानीय कारोबारियों तक पहुंचना चाहिए। इसी सोच के साथ ग्रामीण पर्यटन को आगे बढ़ाया जा रहा है।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि हरियाणा दिल्ली-एनसीआर के पर्यटकों के लिए वीकेंड और अनुभव-आधारित पर्यटन स्थल के रूप में अपनी संभावनाओं को विकसित कर रहा है। कम दूरी और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण राज्य में प्रकृति, कृषि पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, विरासत, आध्यात्मिक और साहसिक पर्यटन के लिए विशाल बाजार उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र की आध्यात्मिक विरासत, सूरजकुंड की सांस्कृतिक पहचान, पिंजौर की ऐतिहासिक विरासत, मोरनी की प्राकृतिक सुंदरता और हरियाणवी गांवों का खान-पान व आतिथ्य मिलकर पर्यटकों को विविध अनुभव प्रदान कर सकते हैं।
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि आने वाले समय में पर्यटन की सफलता का अंदाजा केवल पर्यटकों की संख्या से नहीं लगाया जाएगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि इससे कितना निवेश आया, कितने रोजगार पैदा हुए, स्थानीय कारोबार को कितना लाभ मिला और राज्य की प्रकृति तथा विरासत कितनी सुरक्षित रही।
उन्होंने कहा कि हम ऐसा पर्यटन मॉडल चाहते हैं, जिसमें निवेश भी आए, नवाचार भी हो, रोजगार भी बढ़े और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे। सरकार ‘ग्रीन भी और ग्रोथ भी’ के संतुलन के साथ हरियाणा पर्यटन को आगे लेकर जाएगी। उन्होंने कहा कि देश के विशाल घरेलू पर्यटन बाजार, दिल्ली-एनसीआर की निकटता और राज्य की समृद्ध प्राकृतिक व सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए हरियाणा के पास पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप, ग्रीन टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और नवाचार को एक साथ जोड़कर राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान और मजबूत करने का बड़ा अवसर है।
सम्मेलन में एसोचैम के अध्यक्ष श्री निर्मल कुमार मिंगा, डॉ. सुबी चतुर्वेदी, श्री अंशुमान मैगजीन, श्री रवि गोसाईं, श्री सौरभ सानियाल और डॉ. अरविंद शर्मा के निजी सचिव श्री सुनील लाकड़ा सहित पर्यटन और आतिथ्य उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे।
मजदूरों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कर योजनाओं का लाभ पात्र मजदूरों तक पहुंचाएगी सरकार – रणबीर गंगवा
नायब सिंह सैनी सरकार मजदूरों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध, किसी भी पात्र मजदूर को योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा
हरियाणा भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड के अधिकारियों, मजदूर संगठन की हुई बैठक, तमाम पहलुओं पर हुई चर्चा
हरियाणा के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री श्री रणबीर सिंह गंगवा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए काम कर रही है। मजदूर वर्ग राज्य की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है, इसलिए सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि पात्र मजदूरों को उनके लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिले। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र मजदूर को सरकार की योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा और मजदूरों से संबंधित समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा।
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