हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने रबी की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने रबी की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में ऐतिहासिक वृद्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जताया आभार

चंडीगढ़, 30 सितंबर – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी अधिसूचित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) में की गई वृद्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सी.सी.ई.ए.) द्वारा लिया गया यह फैसला देश और प्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने तथा उन्हें उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विपणन सत्र 2027-28 के लिए अधिसूचित रबी फसलों के एम.एस.पी. में की गई यह वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई उस ऐतिहासिक घोषणा के अनुकूल है, जिसके तहत एम.एस.पी. को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना पर निर्धारित करने का संकल्प लिया गया था। उन्होंने बताया कि इस फैसले के तहत एम.एस.पी. में सबसे अधिक वृद्धि कुसुम के लिए 675 रुपये प्रति क्विंटल घोषित की गई है, जबकि रेपसीड और सरसों के लिए 413 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार मसूर के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल, जौ के लिए 136 रुपये प्रति क्विंटल, चने के लिए 83 रुपये प्रति क्विंटल और गेहूं के मूल्य में 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्पादन लागत पर मिलने वाला अनुमानित मार्जिन किसान-कल्याण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नई एम.एस.पी. दरों के अनुसार किसानों को गेहूं पर अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर 106 प्रतिशत का शानदार मार्जिन मिलेगा, जबकि सरसों और रेपसीड पर 96 प्रतिशत, मसूर पर 92 प्रतिशत, चने पर 59 प्रतिशत, जौ पर 58 प्रतिशत और कुसुम पर 50 प्रतिशत का मार्जिन सुनिश्चित किया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि हाल के वर्षों में केंद्र सरकार खाद्यान्न के अलावा दालों और तिलहन जैसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार उच्च एम.एस.पी. की पेशकश कर रही है। रबी की फसलों के इस बढ़े हुए एम.एस.पी. से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी और उन्हें लाभकारी मूल्य सुनिश्चित होगा, बल्कि इससे राज्य में फसल विविधीकरण (crop diversification) को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि हरियाणा के किसान इन फैसलों से लाभान्वित होकर देश के अन्न भंडार को और समृद्ध करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे।

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