“किसान हमारी आन, बान, शान, मान और सम्मान हैं, धान की फसल लाने वाले किसानों को मंडी में कोई परेशानी नहीं आने देंगे” : ऊर्जा मंत्री अनिल विज हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने कहा कि किसान हमारी आन, बान, शान, मान और सम्मान हैं और हम उन्हें कोई परेशानी नहीं आने देंगे। मंडी में धान की फसल लेकर आए किसानों को कोई दिक्कत न हो, प्रशासन यह सुनिश्चित करे। उन्होंने अंबाला छावनी की मंडी में पहुंची धान की नमी की जांच की और 17 प्रतिशत से कम नमी वाले धान की खरीद करके उसका तुरंत उठान करने के दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जितना भी धान आएगा, हम तुरंत कार्रवाई करके उठान करवाएंगे ताकि मंडी में जगह खाली होती रहे और नए आने वाले किसानों को अपना अनाज रखने के लिए जगह मिल सके।
श्री विज आज अंबाला छावनी में जी.टी. रोड स्थित नई अनाज मंडी में धान की खरीद के काम और किसानों के लिए किए गए प्रबंधों का जायजा लेने के बाद आयोजित कार्यक्रम में किसानों, आढ़तियों और उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान डी.सी. अंबाला सचिन गुप्ता, एस.डी.एम. कनिका गोयल, मार्केट कमेटी अध्यक्ष बलविंदर सिंह, उपाध्यक्ष सुरेंद्र बिंद्रा, नगर परिषद अध्यक्ष स्वर्ण कौर और अन्य लोग भी मौजूद थे।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ अंबाला छावनी की अनाज मंडी का दौरा किया और धान की फसल की खरीद के सभी पुख्ता इंतजामों की जानकारी ली। पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री अनिल विज ने कहा कि धान की फसल की खरीद बीते दिन ही शुरू हो चुकी है। मंडी में फसल सुकाई जा रही है और 17 प्रतिशत से कम नमी वाली फसल को हम खरीद रहे हैं, उन्होंने खुद धान की कुछ ढेरियों पर जाकर नमी की जांच की।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि अंबाला छावनी की अनाज मंडी उन्होंने नई बनाकर दी है, इसमें किसानों की हर सुविधा का ध्यान रखा गया है और इसीलिए यहां किसानों के लिए एक कार्यालय, उनके सोने के लिए एक बेहतरीन रेस्ट हाउस, उनके खाने-पीने के लिए कैंटीन भी खोली गई है। कैंटीन पहले दोपहर तक चलती थी लेकिन अब रात को भी खाना देने की सुविधा है ताकि जो किसान अपनी फसल लेकर मंडी में आएं, उन्हें रात का खाना भी मिल सके। उन्होंने कहा कि मेरे साथ डी.सी. अंबाला भी हैं, जिन्हें कहा गया है कि मंडी में आने वाली फसल का तुरंत उठान हो ताकि आगे आने वाली फसल को रखने के लिए जगह मिल सके।
“नई अनाज मंडी के नाम पर अंबाला छावनी को सिर्फ पत्थर नसीब हुए, काम हमारी सरकार में हुआ” — ऊर्जा मंत्री अनिल विज
वहीं, मंडी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में किसानों, आढ़तियों और अन्य लोगों को संबोधित करते हुए ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि मेरा जन्म इसी शहर में हुआ है। शहर को मैंने सांस लेते देखा है, यह शहर 1835-36 में अंग्रेजों ने बसाया था और यहां सभी तरह के कारोबार के लिए जगह बनाई गई थी लेकिन मंडी के लिए कोई जगह नहीं थी। केवल अंबाला छावनी का एक छोटा सा चौक था, जहां न तो ट्रॉली जाती थी, न फसलों को सुखाने के लिए कोई जगह थी और न ही फसलों को खरीदने-बेचने का कोई उचित तरीका था। कोई वी.आई.पी. अंबाला आता था तो लोगों की सबसे पहली मांग अनाज मंडी बनाने की होती थी। लेकिन हमें सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे। तीन मुख्यमंत्रियों ने मंडी बनाने के पत्थर लगाए लेकिन मंडी आज तक नहीं बनी। अंबाला छावनी को सिर्फ पत्थर ही नसीब हुए, काम नसीब नहीं हुआ। काम होना तब शुरू हुआ जब हमारी सरकार आई।
नई अनाज मंडी में अब एक दिन में उतना अनाज आ रहा है जितना पुरानी अनाज मंडी में महज एक महीने में आता था
उन्होंने कहा कि 2014 में जब हमारी सरकार आई तो सबसे पहला काम जो मैंने किया, वह अंबाला छावनी में अनाज मंडी बनाकर दी। उन्होंने बताया कि अनाज मंडी यहां बनने से विपक्ष के एक व्यक्ति, जो कि एक आढ़ती था, ने भी इसकी सराहना करते हुए मुझसे कहा था कि अनाज मंडी यहां शिफ्ट होने से नई अनाज मंडी में अब एक दिन में उतना अनाज आ रहा है जितना पुरानी अनाज मंडी में महज एक महीने में आता था। अनाज मंडी यहां आने से हमारी जिंदगी बन गई।
शहीद स्मारक में 1857 के संघर्ष का इतिहास 21 गैलरी वाले भव्य स्मारक में दिखेगा : अनिल विज ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने इस अवसर पर यह भी कहा कि यहां पास में ही हाईवे पर आजादी की पहली लड़ाई का भव्य शहीदी स्मारक बनाने का काम किया गया है। यह स्मारक बनकर तैयार हो चुका है, जल्द ही इसका उद्घाटन करवाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किताबों में हमें यही पढ़ाया गया कि आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी, लेकिन कांग्रेस का जन्म 1885 में हुआ था, जिसे एक अंग्रेज ए.ओ. ह्यूम ने बनाया था। उसी ने अंग्रेजी शब्द कांग्रेस के नाम पर पार्टी बनाई और कांग्रेस अंग्रेजी का शब्द है। उन्होंने कहा कि हिंदी का शब्द भारतीय जनता पार्टी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के जन्म से 28 साल पहले भी देश की आजादी के लिए 1857 में सशस्त्र लड़ाई लड़ी गई थी और हजारों लोग गोलियों से मारे गए तथा हजारों को जेल में डाला गया। उन्होंने जब शोध किया तो पता चला कि 1857 में आजादी की लड़ाई की शुरुआत अंबाला छावनी से हुई थी, यानी मेरठ से 9 घंटे पहले यहां सशस्त्र संघर्ष शुरू हो चुका था। इसीलिए वे लंबे समय से यहां स्मारक बनाने की मांग कर रहे थे। वे सात बार विधायक रहे हैं, चाहे वे सत्ता में रहे हों या विपक्ष में, वे बोलने से कभी नहीं चुके। उन्होंने यहां शहीद स्मारक बनाने की मांग को लगातार उठाया। हिंदुस्तान को आजाद करवाने के लिए अगर किसी ने एक कदम भी बाहर निकाला तो वे उसके चरण छूना चाहते हैं। 1857 के शहीदों को कभी श्रद्धांजलि नहीं दी गई, न ही उन्हें याद किया गया। इसलिए उन शहीदों को श्रद्धा के फूल भेंट करने के लिए आज शहीदों की याद में 800 करोड़ रुपये की लागत से शहीदी स्मारक बनकर तैयार है। हमारे पास 1857 के पुख्ता दस्तावेज हैं कि कैसे-कैसे और कहां-कहां उस समय संघर्ष हुआ। अंग्रेज अफसर द्वारा लिखे गए एक दस्तावेज से भी स्पष्ट होता है कि मेरठ से नौ घंटे पहले अंबाला में संघर्ष शुरू हुआ था। स्मारक में हमने 21 गैलरी बनाई हैं और देश में जहां-जहां 1857 में संघर्ष हुआ, वह बहुत ही आकर्षक तरीके से यहां प्रदर्शित किया जाएगा। इसी के साथ साइंस म्यूजियम भी जल्द बनकर तैयार हो रहा है।
सत्ता हमारे लिए सुख भोगने का साधन नहीं, बल्कि सेवा करने का साधन है – विज ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि 1952 से मेरे मंत्री बनने से पहले तक जितने भी विधायक और सांसद रहे, उन सभी के विकास कार्यों को जोड़ लिया जाए तो मेरे द्वारा करवाए गए विकास कार्यों के आगे वे एक प्रतिशत भी नहीं होंगे। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार की मेहरबानी है, हमारी पार्टी का संदेश और भारतीय जनता पार्टी की संस्कृति है कि सत्ता हमारे लिए सुख भोगने का साधन नहीं, बल्कि सेवा करने का साधन है। उन्होंने कहा कि मैंने दिन-रात एक करके अंबाला छावनी को जिसकी जरूरत थी, सब-डिवीजन बना दिया, सुभाष पार्क बना दिया और कई अन्य विकास कार्य करवाए, जिनकी अंबाला छावनी मांग कर रही थी, “मैंने ब्याज समेत सरकारों से छीन-छीनकर यहां लाकर बना दिए हैं”।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने दी चुनौती, कहा “मेरे द्वारा किए गए विकास कार्य गिना दे तो मैं उसे 31 हजार रुपये का इनाम दूंगा”
इस दौरान ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने चुनौती देते हुए कहा कि कोई यहां आकर मेरे द्वारा किए गए विकास कार्य गिना दे तो मैं उसे 31 हजार रुपये का इनाम दूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि मेरे द्वारा करवाए गए काम जिंदा हैं, वे खुद अपनी कहानी बोलते हैं कि ये किसने बनाकर दिए हैं। नामुमकिन कामों को मैंने मुमकिन करके दिखाया है, जो हो सकता था और यह सब आप लोगों द्वारा दी गई ताकत और विश्वास से हुआ है। इस अवसर पर मंडी एसोसिएशन के संयुक्त सचिव सुशील गोयल ने मुख्य अतिथि को शॉल और पर्यावरण का प्रतीक (पौधा) भेंट करके उनका स्वागत भी किया।
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