“यदि विपक्षी पार्टियाँ गलती से सत्ता में आती हैं, तो वे मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और एक हजार रुपये की सम्मान राशि बंद कर देंगी”: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज चेतावनी दी कि पारंपरिक विपक्षी पार्टियों की सत्ता में वापसी से पंजाब की कल्याणकारी योजनाएं, सरकारी संस्थान और पानी के अधिकार खतरे में पड़ जाएंगे क्योंकि उनकी प्राथमिकताएं पहले ही जनता के सामने उजागर हो चुकी हैं। अजनाला हलके के गांव सेंसरा में विशाल ‘लोक मिलनी’ (जनसभा) के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि विपक्ष मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और एक हजार रुपये की सम्मान राशि बंद कर देगा, जबकि निजी संस्थानों को बढ़ावा देने के लिए मोहल्ला क्लीनिकों और सरकारी स्कूलों को कमजोर किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने इशारा किया कि भाजपा पंजाब के हिस्से का पानी हरियाणा और राजस्थान को दे देगी तथा चंडीगढ़ व पंजाब यूनिवर्सिटी को भी पंजाब से अलग करने की कोशिश करेगी, जबकि अकाली दल अपनी रैलियों में दिहाड़ीदार मजदूरों को लाने तक ही सीमित होकर रह गया है। अपनी सरकार के रिकॉर्ड से इसकी तुलना करते हुए उन्होंने 90 प्रतिशत घरों के लिए शून्य बिजली बिल, गोइंदवाल साहिब निजी थर्मल पावर प्लांट की खरीद, नहरी पानी का उपयोग 22 प्रतिशत से बढ़ाकर 88 प्रतिशत करने, 14,000 किलोमीटर पाइपलाइनों और सरकारी स्कूलों में बड़े सुधारों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार का एकमात्र मकसद हर परिवार को सुविधाएं पहुंचाना और खुशहाल ‘रंगला पंजाब’ बनाना है।

एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, “आज अजनाला विधानसभा हलके के गांव सेंसरा में ‘लोक मिलनी’ के दौरान माझा के मेहनती लोगों से मुलाकात की और विचार-विमर्श किया। इतनी बड़ी संख्या में पहुंचकर हमें बेहिसाब प्यार और सम्मान देने के लिए मैं सभी का तहे दिल से धन्यवाद करता हूं। गांव की तीन पंचायतों को विकास कार्यों के लिए 20-20 लाख रुपये के हिसाब से 60 लाख रुपये के चेक सौंपे गए। हमारी सरकार ने 90 प्रतिशत घरों के बिजली बिल शून्य कर दिए हैं, गोइंदवाल साहिब में निजी थर्मल पावर प्लांट खरीदा है और नहरी पानी का उपयोग 22 प्रतिशत से बढ़ाकर 88 प्रतिशत कर दिया है।”

पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “पूरे पंजाब में 14,000 किलोमीटर पाइपलाइनें बिछाई गई हैं। सरकारी स्कूलों का सुधार करके पंजाब को देश भर में शिक्षा के क्षेत्र में पहले नंबर पर लाया गया है। लोगों को लूटने वाली पारंपरिक पार्टियों का हाल आज सबके सामने है। हमारी सरकार का एकमात्र उद्देश्य पंजाब के लोगों को सुविधाएं देना और एक बार फिर ‘रंगला पंजाब’ बनाना है। इंकलाब जिंदाबाद।”

लोक मिलनी के दौरान जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “15 सितंबर को छह राज्यों—हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली ने किशाऊ प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, लेकिन पंजाब को इसमें शामिल नहीं किया गया। दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों के बीच समझौते हो रहे हैं, लेकिन पंजाब को न्योता तक नहीं दिया जाता। जब सवाल इस क्षेत्र के जल संसाधनों का है तो पंजाब के साथ बेगानों जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है?”

मुख्यमंत्री ने कहा, “भाजपा पंजाब को चर्चा से बाहर रखकर पानी के बंटवारे का फैसला करना चाहती है। पंजाब के लोग इस सौतेले व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेंगे। पंजाब ने देश के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है। हमारे किसानों ने देश का पेट भरा है, हमारे जवानों ने सीमाओं की रक्षा की है और हमारे लोगों ने भारत की प्रगति में योगदान दिया है। जब पंजाब के हितों से जुड़े फैसले उसके बिना लिए जा रहे हों, तो पंजाब से चुप रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती।”

उन्होंने कहा, “हमारी सरकार पंजाब से जुड़े हर मुद्दे को दृढ़ता से उठाएगी और राज्य के अधिकारों व हितों से कोई समझौता नहीं करेगी। पंजाब के प्रति हमारा उठाया गया हर कदम हमें लोगों की बेहतर सेवा करने के लिए बड़ा हौसला देता है।”

गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में पहुंचने के लिए लोगों का धन्यवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं लोगों द्वारा दिखाए जा रहे प्यार और सम्मान का आदर करता हूं। गर्मी के बावजूद लोग इतनी बड़ी संख्या में यहां आए हैं और हमारे साथ खड़े हैं। मैं माझा के लोगों, खासकर माताओं-बहनों का विशेष स्वागत करता हूं, जो अपनी दैनिक जिम्मेदारियां छोड़कर इस कार्यक्रम में शामिल हुईं। माझा ने पंजाब के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में हमेशा निर्णायक भूमिका निभाई है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “माझा में आना हमेशा खुशी की बात होती है क्योंकि इस क्षेत्र के लोगों में सरकारें बनाने और गिराने की ताकत है। हमारी सरकार की नी नीतियों का असर अब पूरे पंजाब में दिखाई दे रहा है।”

सरकार के कामों पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार ने हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी है, जिससे पूरे पंजाब के परिवारों को बड़ी राहत मिली है। हमने पानी के क्षेत्र में भी व्यापक काम किया है और उपलब्ध जल संसाधनों के उपयोग में काफी वृद्धि की है।”

उन्होंने कहा, “जब मैंने शपथ ली थी तो सिंचाई के लिए सिर्फ 22 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग हो रहा था। चार सालों में हमारी सरकार ने इस उपयोग को लगभग 88 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है। यह पहले से चार गुना अधिक है।”

उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने पूरे पंजाब में लगभग 14,000 किलोमीटर पानी की पाइपलाइनें बिछाई हैं। इस काम का दायरा पंजाब से कनाडा के वैंकूवर के बीच की दूरी के बराबर है। यह जन-कल्याणकारी कार्य हैं। हम कुछ शक्तिशाली परिवारों के लिए काम नहीं कर रहे। हम हर गांव, हर किसान और हर घर के लिए काम कर रहे हैं।”

बादल परिवार और अकाली दल पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के लोगों ने उनका राजनीतिक पतन देखा है। पिछली सरकारें पंजाब के व्यापक हितों के लिए काम करने में असफल रहीं और राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों के लिए किया गया।”

उन्होंने कहा, “लगभग हर व्यापार में उनका हिस्सा था, लेकिन पंजाब में मेरा सिर्फ एक ही हिस्सा है—मेरे लोगों के सुख-दुख में हिस्सा।”

समर्थकों द्वारा भेंट की गई फूलों वाली पगड़ी का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “लोगों का प्यार अनमोल है। इस प्यार की कोई कीमत नहीं है और इसे किसी मुद्रा में नहीं मापा जा सकता। यह अनमोल है।”

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जो लोग जनता द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब देने में असफल रहे, वे अब राजनीतिक गठबंधन तलाश रहे हैं। विपक्षी पार्टियां आंतरिक रूप से बंटी हुई हैं और लोगों के सामने एक स्पष्ट विकल्प पेश करने में असमर्थ हैं।”

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस में हर कोई मुख्यमंत्री बनना चाहता है, लेकिन पहले उन्हें यह गिनना चाहिए कि उनके पास कितनी सीटें हैं।”
उन्होंने यह भी कहा, “अकाली दल का राजनीतिक कार्यक्रम मुख्य रूप से कुछ लोगों तक सीमित होकर रह गया है। पंजाब के लोगों ने देख लिया है कि उनकी राजनीति उन्हें कहां ले गई है।”
मावां-धीयां सत्कार योजना’ पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “महिलाओं को दी जा रही वित्तीय सहायता का उपयोग घरेलू खर्चों, स्कूल फीस और अन्य जरूरी जरूरतों के लिए किया जा रहा है। सहायता प्राप्त करने वाले इसका उपयोग अपने परिवारों की जरूरतों के लिए कर रहे हैं। इसलिए, कल्याणकारी खर्चों की आलोचना को सही नहीं ठहराया जा सकता।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछली सरकारों ने कभी भी सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल ऐसी प्रत्यक्ष जन-कल्याण के लिए नहीं किया। हमारी सरकार ने सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ बोलने पर झूठी प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की प्रथा भी बंद कर दी है।

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