“’कंगना को ज़िंदगी का छात्र बनना सीखना चाहिए’: अभिनेता द्वारा खुद को ‘निकम्मा’ कहे जाने पर बोले सौरव दास”

भाजपा सांसद एवं अभिनेत्री कंगना रनौत और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास के बीच वाकयुद्ध (बयानबाज़ी), अभिनेत्री की व्यक्तिगत टिप्पणियों के बाद और तेज़ हो गया है। कंगना के उस दावे का जवाब देते हुए, जिसमें उन्होंने दास को 28 वर्षीय “छात्र” तथा “निकम्मा और बेरोज़गार” कहा था, दास ने कहा कि अभिनेत्री ने इंटरनेट पर उपलब्ध ग़लत जानकारी पर भरोसा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे 27 वर्ष के हैं, एक पत्रकार के रूप में काम करते हैं और उन्होंने कभी भी सक्रिय छात्र होने का दावा नहीं किया है।

यह ताज़ा बयानबाज़ी, नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवा-नेतृत्व वाली CJP के विरोध-प्रदर्शन के समापन के कुछ दिनों बाद सामने आई है। प्रदर्शनों से जुड़े एक मतभेद के रूप में शुरू हुआ यह विवाद, अब एक व्यक्तिगत और सार्वजनिक झगड़े में बदल चुका है, जिसमें दोनों पक्ष सोशल मीडिया और साक्षात्कारों (इंटरव्यू) में एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं।
सरल एवं प्रत्यक्ष अनुवाद:“’कंगना को ज़िंदगी का छात्र बनना सीखना चाहिए’: अभिनेत्री द्वारा ‘निकम्मा’ (बेकार) बताए जाने पर सौरव दास का जवाब” समाचार हेडलाइन शैली कंगना के ‘निकम्मा’ वाले बयान पर बोले सौरव दास — ‘उन्हें ज़िंदगी का विद्यार्थी बनना सीखना चाहिए’ शब्दकोश और संदर्भ (“ज़िंदगी का विद्यार्थी/छात्र बनना सीखना चाहिए”। (यहाँ सौरव दास का तात्पर्य यह था कि इंसान को हर उम्र में जीवन से सीखते रहना चाहिए)। इसके लिए संदर्भ अनुसार “निकम्मा”, “बेकार” या “किसी काम का नहीं” शब्द का प्रयोग किया जाता है।

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