एनईपी के तहत उच्च शिक्षा में एनसीसी, एनएसएस, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को मिलेगी अकादमिक मान्यता – शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा
हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक रूप से लागू करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के तहत एक महत्वपूर्ण योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के सर्वांगीण (360-डिग्री) विकास को बढ़ावा देने के लिए एन.सी.सी., एन.ਐੱਸ.ਐੱਸ., खेल एवं योगासन, सांस्कृतिक गतिविधियों, यूथ रेड क्रॉस, इनक्यूबेशन और आउटरीच गतिविधियों को अंडर-ग्रेजुएट (UG) और पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) अकादमिक ढांचे के तहत औपचारिक मान्यता प्रदान की गई है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि यह आदेश राज्य के उच्च शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले सभी राज्य विश्वविद्यालयों, सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त, स्व-वित्तपोषित और निजी कॉलेजों के प्राचार्यों और प्रबंधकों पर समान रूप से लागू होंगे।
उन्होंने कहा कि इस क्रांतिकारी कदम से हरियाणा के युवाओं का न केवल मानसिक और बौद्धिक विकास होगा, बल्कि उनमें देश सेवा, अनुशासन और नेतृत्व की भावना भी अधिक मजबूत होगी।
विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व निर्माण पर जोर:
शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने कहा कि पारंपरिक किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक, सामाजिक और शारीरिक कौशल आज के युवाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है। NEP का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री धारक बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार, अनुशासित और बहुमुखी प्रतिभा का धनी नागरिक बनाना है। अब तक खेल, योग, एनएसएस या एनसीसी जैसी गतिविधियों में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को अतिरिक्त अकादमिक लाभ नहीं मिल पाता था, लेकिन इस नई व्यवस्था के तहत इन गतिविधियों को उनके पाठ्यक्रम और क्रेडिट सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
मंत्री ने बताया कि योजना को लागू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संलग्न दिशा-निर्देशों के अनुसार अपने-अपने संस्थानों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। यह फैसला सक्षम अधिकारी की औपचारिक सहमति के बाद जारी किया गया है। पाठ्यचर्या गतिविधियों (co-curricular activities) को ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री फ्रेमवर्क का हिस्सा बनाया गया है। यह व्यवस्था राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी संस्थानों में लागू होगी। विद्यार्थियों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए इनक्यूबेशन और आउटरीच गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा।
2. हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का होगा विस्तार: नए स्वास्थ्य केंद्र खुलेंगे, 2 का हुआ अपग्रेडेशन
चंडीगढ़, 28 सितंबर: हरियाणा सरकार राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने दो मौजूदा सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को अपग्रेड करने और दो नए स्वास्थ्य संस्थान स्थापित करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है।
हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आम जनता को उनके घर के पास ही बेहतर और सुलभ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अपनी मंजूरी दी है।
इस फैसले के तहत फरीदाबाद जिले के ग्रामीण और शहरी सीमावर्ती क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलेगी। फरीदाबाद के गांव मंझावली स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्र (Sub-Health Centre) को अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। वहीं, गांव पल्ला सेहतपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा बढ़ाकर उसे 50 बिस्तरों की क्षमता वाले आधुनिक अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (Urban CHC) के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों को आपातकालीन और विशेष चिकित्सा सेवाओं के लिए दूर-दराज के बड़े अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
इसके अलावा, झज्जर जिले के गांव बुपेनिया में एक नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) खोलने और सिरसा जिले के गांव अरनियावाली में नया उप-स्वास्थ्य केंद्र (Sub-Health Centre) स्थापित करने की मंजूरी दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के इस नए विस्तार से आसपास के दर्जनों गांवों के निवासियों, महिलाओं और बच्चों को प्राथमिक उपचार, आवश्यक दवाएं और नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधाएं अपने पास ही मिल सकेंगी। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि बड़े जिला स्तरीय अस्पतालों पर मरीजों का अत्यधिक दबाव भी कम हो सकेगा।
3. हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: बागवानी फसलों की खेती के लिए किसानों को मिलेगी अनुदान राशि
चंडीगढ़, 28 सितंबर: हरियाणा सरकार द्वारा राज्य में बागवानी को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से ‘बागवानी फसलों की खेती के लिए अनुदान प्रावधान’ योजना लागू की गई है।
बागवानी विभाग हरियाणा के एक प्रवक्ता ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि सरकार राज्य के किसानों को फल, सब्जियां, फूल, मसाले और सुगंधित पौधों की खेती करने पर भारी सब्सिडी प्रदान कर रही है। इस योजना के तहत आवेदन और अनुदान की सीमा भी निर्धारित की गई है, जिसके अनुसार फलों के नए बाग लगाने और मसालों की खेती पर अधिकतम 5 एकड़ तक का लाभ लिया जा सकता है। वहीं सब्जियों की खेती के लिए सामान्य वर्ग के किसान अधिकतम 5 एकड़ और अनुसूचित वर्ग के किसान 1 एकड़ तक का लाभ ले सकते हैं, जबकि फूलों और सुगंधित पौधों की खेती पर यह सीमा 5 एकड़ तक तय की गई है।
प्रवक्ता ने अनुदान राशि के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि नए बाग लगाने पर किसानों को ₹24,500 से ₹1,40,000 प्रति एकड़ तक का अनुदान दिया जाएगा। सब्जियों की खेती के लिए सामान्य वर्ग को ₹15,000 प्रति एकड़ और अनुसूचित वर्ग को ₹25,500 प्रति एकड़ की दर से अनुदान दिया जाएगा, जो कि मल्चिंग, लो टनल, ड्रिप या बांस की स्टेकिंग जैसे एकीकृत मॉडल अपनाने पर ही देय होगा। इसी तरह मसालों की खेती पर ₹15,000 से ₹30,000 प्रति एकड़, फूलों की खेती पर ₹8,000 से ₹40,000 प्रति एकड़ और सुगंधित पौधों की खेती पर ₹8,000 प्रति एकड़ अनुदान का प्रावधान किया गया है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अनुदान की यह पूरी राशि सीधे लाभार्थी किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल और ‘हॉर्टनेट’ (Hortnet) पर पंजीकरण होना अनिवार्य है। इसके साथ ही आवेदकों के पास व्यक्तिगत विवरण, परिवार पहचान-पत्र, बैंक खाते का पूरा विवरण (खाता संख्या, बैंक नाम, शाखा और आईएफएससी कोड) और आवश्यकता पड़ने पर अनुसूचित वर्ग का प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।
उन्होंने राज्य के सभी इच्छुक किसानों से इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि विस्तृत जानकारी के लिए किसान अपने संबंधित जिला बागवानी अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं या टोल-फ्री नंबर 1800-180-2021 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा विभागीय वेबसाइट www.hortharyana.gov.in या ई-मेल horticulture@hry.nic.in के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
4. स्तनपान के प्रति जागरूकता: महिला एवं बाल विकास विभाग ने मां और बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य के लिए दिए विशेष दिशा-निर्देश
चंडीगढ़, 28 सितंबर: हरियाणा सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नवजात बच्चों और माताओं के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष ‘स्तनपान जागरूकता’ अभियान चलाया जा रहा है।
इस संबंध में विभाग के एक प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि मां का दूध बच्चे के लिए पहला टीका, पहली खुराक और पहला प्यार है, जो बच्चे के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि स्तनपान केवल बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद है। मां को मिलने वाले लाभों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि स्तनपान से गर्भाशय को जल्द सामान्य स्थिति में आने में मदद मिलती है, स्तन और अंडाशय (ओवरी) के कैंसर का खतरा घटता है, वजन घटाने में सहायता मिलती है और यह मां व बच्चे के बीच भावनात्मक लगाव को मजबूत करता है।
इसके अलावा यह आर्थिक रूप से भी मददगार है, क्योंकि मां का दूध हमेशा साफ-सुथरा, सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध रहता है। वहीं, बच्चे के लिए इसके फायदों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह बच्चे को बीमारियों से बचाने के लिए प्राकृतिक प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) प्रदान करता है, दिमाग के विकास में सहायक होता है और हर पोषक तत्व उचित मात्रा में प्रदान करता है। यह आसानी से पच जाता है, जिससे एलर्जी, दस्त और संक्रमण का खतरा कम हो जाता है, और यह हमेशा सुरक्षित व तैयार खुराक के रूप में उपलब्ध रहता है।
कब और कैसे स्तनपान कराया जाए, इस विषय पर प्रवक्ता ने विस्तार से गाइडलाइन साझा की। उन्होंने कहा कि जन्म के तुरंत बाद, यानी एक घंटे के भीतर बच्चे को स्तनपान शुरू कर देना चाहिए। इसके बाद शुरुआती 6 महीने तक बच्चे को सिर्फ और सिर्फ मां का ही दूध पिलाना चाहिए। 6 महीने पूरे होने के बाद उपयुक्त ऊपरी आहार की शुरुआत के साथ-साथ स्तनपान जारी रखना चाहिए और इसे बच्चे की 2 वर्ष या उससे अधिक उम्र तक जारी रखा जा सकता है।
स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए जरूरी सुझाव देते हुए प्रवक्ता ने कहा कि माताओं को खुद साफ-सुथरा और पौष्टिक भोजन खाना चाहिए और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही माताओं के लिए पूरा आराम करना, धूम्रपान, शराब या किसी भी तरह के नशीले पदार्थों से दूर रहना और स्तनपान से पहले हाथों को अच्छी तरह साफ करना बहुत जरूरी है। उन्होंने परिवार के सदस्यों से भी अपील की कि वे स्तनपान कराने वाली माताओं को पूरा सहयोग और प्रोत्साहन दें।
प्रवक्ता ने ‘मां का दूध अनमोल है – इसे अपनाएं, बच्चे का भविष्य सुरक्षित बनाएं’ का संदेश देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की सहायता या जानकारी के लिए महिला हेल्पलाइन नंबर 181 या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क किया जा सकता है।
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