सभी उपायुक्त राजस्व विभाग से जुड़ी शिकायतों के निवारण तंत्र को प्रभावी बनाएं – मुख्यमंत्री
भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण में तेजी लाने के निर्देश दिए
किसानों को एग्री स्टैक कार्यक्रम से जोड़ने के लिए चलाया जाए विशेष जागरूकता अभियान
चंडीगढ़, 20 जुलाई –(प्रेस की ताकत)
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को हरियाणा निवास, चंडीगढ़ में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कामकाज की समीक्षा करते हुए डिजिटल गवर्नेंस, भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण और नागरिक-केंद्रित सुधारों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व विभाग की प्रत्येक सेवा पारदर्शी, तकनीक-आधारित और निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाए ताकि नागरिकों को बिना किसी अनावश्यक देरी के बेहतर सेवाएं मिल सकें। बैठक में राज्य के सभी जिला उपायुक्तों (DC) और डीएमसी (DMC) सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव और वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि विभाग ने मई 2025 में अपना पहला इन-हाउस सूचना प्रौद्योगिकी (IT) डिविजन स्थापित करके व्यापक डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इससे बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता कम हुई है और विभागीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास तथा रखरखाव में तेजी आई है। इस तकनीकी टीम में सॉफ्टवेयर डेवलपर, यूआई/यूएक्स (UI/UX) डिजाइनर, तकनीकी दस्तावेज विशेषज्ञ और सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर सहित 16 स्वीकृत पद शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने एकीकृत राजस्व पोर्टल (इंटीग्रेटेड रेवेन्यू पोर्टल) की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्हें बताया गया कि यह पोर्टल नागरिकों और विभागीय अधिकारियों के लिए एक एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में विकसित किया गया है। इसके माध्यम से नागरिकों को ऑनलाइन राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पोर्टल में अधिकारियों के लिए सिंगल साइन-ऑन (SSO) प्रणाली और सेवा वितरण तथा लंबित मामलों की रियल-टाइम निगरानी के लिए एकीकृत डैशबोर्ड की सुविधा भी उपलब्ध है।
राजस्व शिकायत निवारण प्रणाली को और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए मुख्यमंत्री ने शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इसे और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-अनुकूल बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक को न्याय मिलना चाहिए। जिन आवेदकों के आवेदन खारिज (रिजेक्ट) हुए हैं और यदि वे फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, तो उन्हें पुनर्विचार का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।
शिकायत डैशबोर्ड की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी आवेदनों के निपटान में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। प्रत्येक खारिज किए गए आवेदन में अस्वीकृति का स्पष्ट कारण दर्ज किया जाए और उसका उचित रिकॉर्ड रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि खारिज किए गए मामलों की समय-समय पर रैंडम जांच की जाए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति प्रक्रियात्मक त्रुटि (procedural error) या गलत जांच के कारण लाभ से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों (डेप्युटी कमिश्नर) को हिदायत दी कि जिलों में आयोजित किए जा रहे साप्ताहिक समाधान कैंपों में तहसीलदारों और राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि मौके पर ही राजस्व विभाग से संबंधित समस्याओं का समाधान संभव हो सके।
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