“दादा लखमीचंद हरियाणा की आत्मा और हमारी लोक संस्कृति के अमर बोल – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी”

कहा, हरियाणा की लोक संस्कृति और साहित्य हमारी सबसे बड़ी धरोहर, इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना सरकार का संकल्प
जिस समाज का साहित्य जीवित रहता है, उसकी संस्कृति कभी खत्म नहीं होती
साहित्य समाज की चेतना को दिशा देता है, कलाकार संस्कृति को जीवित रखते हैं
हरियाणा सरकार भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध
मुख्यमंत्री ने दादा लखमीचंद जयंती पर साहित्यकार सम्मान समारोह में साहित्यकारों, कवियों और कलाकारों को किया सम्मानित

चंडीगढ़, 24 जुलाई: मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूर्य कवि पंडित दादा लखमीचंद सिर्फ एक कवि नहीं थे, बल्कि हरियाणा की आत्मा, लोक संस्कृति के रक्षक और जन-जन के शिक्षक थे। उन्होंने अपनी रागनियों और सांगों के माध्यम से सत्य, त्याग, धर्म, निष्ठा और मानवीय मूल्यों को समाज तक पहुँचाया। दादा लखमीचंद ने सिर्फ मनोरंजन नहीं किया, बल्कि पीढ़ियों का चरित्र निर्माण किया और लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाई।
श्री नायब सिंह सैनी रोहतक में ‘दादा लखमीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय’ के केंद्रीय सभागार (ऑडिटोरियम) में विश्वविद्यालय और ‘हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला’ के संयुक्त प्रयासों से सूर्य कवि दादा लखमीचंद जी की जयंती के अवसर पर आयोजित साहित्यकार सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने दादा लखमीचंद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया, विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण किया और विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई शानदार प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित कर औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों, कवियों और कलाकारों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी ऊँची इमारतों या आर्थिक प्रगति से नहीं, बल्कि उसकी भाषा, साहित्य, संस्कृति और कलाकारों से होती है। इतिहास घटनाओं को दर्ज करता है, लेकिन साहित्य एक युग की संवेदनाओं को अमर बना देता है। जो समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करता है, वही भविष्य की मजबूत नींव रखता है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता को अपनाना जरूरी है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

श्री नायब सिंह सैनी ने सम्मानित होने वाले साहित्यकारों, कवियों और कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी लेखनी सिर्फ शब्दों का सृजन नहीं करती, बल्कि समाज की चेतना को दिशा देती है। उनकी कला सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि संस्कृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखने का काम करती है। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों का सम्मान वास्तव में समाज की रचनात्मक चेतना का सम्मान है।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार हरियाणा की भाषा, साहित्य, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य सिर्फ कलाकारों और साहित्यकारों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना भी है। इसी सोच के तहत रोहतक स्थित विश्वविद्यालय का नाम ‘दादा लखमीचंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विश्वविद्यालय’ रखा गया है। यह सिर्फ नामकरण नहीं, बल्कि हरियाणा की सांस्कृतिक चेतना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सरकार का संकल्प है।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा हिंदी में विश्वविद्यालय स्तर के विभिन्न विषयों की पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है, जिससे मातृभाषा में उच्च शिक्षा को नई गति मिल रही है। साथ ही फ़ारसी लिपि में उपलब्ध दुर्लभ हिंदी साहित्य को देवनागरी में प्रकाशित करने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया जा रहा है, ताकि ऐतिहासिक धरोहर नई पीढ़ी तक पहुँच सके।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी भाषा, साहित्य, इतिहास और संस्कृति के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है। पंचकूला स्थित हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी भवन साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का एक शक्तिशाली केंद्र बन चुका है, जबकि राखीगढ़ी स्थित ‘सप्त सिंधु हड़प्पा ज्ञान केंद्र’ भारत की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसी सांस्कृतिक चेतना का निर्माण करना है, जिससे नई पीढ़ी अपनी भाषा, इतिहास, परंपराओं और राष्ट्र पर गर्व कर सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हरियाणा अपनी समृद्ध भाषा, साहित्य और लोक संस्कृति के बल पर देश और दुनिया में नई पहचान स्थापित करेगा। उन्होंने पंडित लखमीचंद के पोते विष्णु दत्त कौशिक को स्मृति चिह्न और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। पंडित लखमीचंद के पड़पोते चेतन कौशिक और विश्वविद्यालय के छात्र योगेश ने दादा लखमीचंद की रचनाओं की प्रस्तुति दी।

#DadaLakhmiChand #NayabSinghSaini #HaryanaCulture #SuryaKavi #FolkCulture #HaryanaHeritage #HaryanaSahitya #HaryanviCulture #CulturalHeritage #HaryanaGovt #HaryanaUpdates #HaryanaCM #AmritMahotsav #DadaLakhmiChand #NayabSinghSaini #HaryanaCulture #HaryanaHeritage #SuryaKavi #FolkCulture #HaryanviCulture #HaryanaGovt

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *