नाबार्ड बना हरियाणा के ग्रामीण विकास और किसान सशक्तिकरण का मजबूत आधार : डॉ अरविंद शर्मा

चंडीगढ़,16 जुलाई -हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि किसान की समृद्धि के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है और इस दिशा में नाबार्ड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। हरियाणा न केवल देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है, बल्कि कृषि नवाचार, फसल विविधीकरण और प्रसंस्करण आधारित खेती में भी अग्रणी राज्य बन चुका है। ऐसे में नाबार्ड की उपस्थिति हरियाणा के समग्र ग्रामीण विकास में एक उत्प्रेरक की भूमिका निभा रही है। पैक्स कम्प्यूटरीकरण, केसीसी का डिजिटलीकरण, एफपीओ, जेएलजी व एसएचजी नेटवर्क की मजबूती और सहकारी संस्थाओं को तकनीकी प्रशिक्षण व समर्थन देने जैसे अनेक आयामों में नाबार्ड का योगदान बहुआयामी और दूरगामी रहा है।

 सहकारिता मंत्री डॉ अरविंद शर्मा आज चंडीगढ़ में नाबार्ड के 44 वें स्थापना दिवस पर उपस्थित प्रबुद्धजनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सहकारिता क्षेत्र को डिजिटल, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने के लिए संकल्पबद्ध है और इस दिशा में नाबार्ड एक प्रेरक शक्ति बनकर कार्य कर रहा है। आज सहकारी संस्थाएं केवल ऋण, खाद व बीज वितरण तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में ये संस्थाएं जन औषधि केंद्र, गैस स्टेशन, सीएससी सेंटर सहित 25 से अधिक सेवाओं का माध्यम बन चुकी हैं।

डॉ. शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 500 सीएम-पैक्स के गठन का लक्ष्य रखा है, जिनमें से 161 पहले ही गठित की जा चुकी हैं। इन मल्टीपर्पज़ पैक्स के माध्यम से गांवों में छोटे वेयरहाउस, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न वितरण और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, जिससे किसानों को लाभ मिलने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं को रोजगार और स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता मिल रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के “हर गांव में पैक्स” के संकल्प को साकार करने की दिशा में सहकारिता आंदोलन एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। “सहकार से समृद्धि” के मंत्र को आधार बनाकर प्राथमिक कृषि साख समितियों को मल्टीपर्पज़ संस्थाओं में परिवर्तित किया जा रहा है, ताकि खाद, बीज, ऋण, भंडारण, विपणन जैसी सभी सुविधाएं किसानों को एक ही स्थान पर मिल सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार नई सहकारिता नीति के माध्यम से आत्मनिर्भर राज्य और कृषि आधारित सशक्त अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में ठोस पहल कर रही है। नाबार्ड के सहयोग से छोटे गोदामों की स्थापना, वित्तीय सहायता और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देकर किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक की पूरी श्रृंखला में मजबूती दी जा रही है।डॉ. शर्मा ने कहा कि महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के स्वप्न और विकसित भारत की कल्पना को साकार करने में सहकारिता की यह नई गति मील का पत्थर साबित हो रही है।

श्रीमती निवेदिता तिवारी, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड हरियाणा ने बताया कि नाबार्ड ने पिछले चार दशकों में कृषि वित्त, सहकारी संस्थाओं के सशक्तीकरण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण, वित्तीय समावेशन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और ग्रामीण कौशल एवं उद्यमिता विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नाबार्ड ने किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, संयुक्त देयता समूहों, गैर-कृषि उत्पादक संगठनों जैसे ग्रामीण संगठनों का गठन और पोषण किया है। पिछले 43 वर्षों में अंतिम छोर तक वित्तीय सेवाएँ पहुंचाने के लिए नाबार्ड ने सहकारी बैंकों को निरंतर पुनर्वित्त सहायता उपलब्ध करवाई है। बुनियादी ढांचे; सीबीएस और CBS+, पैक्स कम्यूटरीकरण और टेक्नोलोजी विकास के जरिए सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने का निरंतर प्रयास किया है।

इस अवसर पर कार्यक्रम में भारतीय रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक श्री विवेक श्रीवास्तव, एस.एल.बी.सी. हरियाणा के संयोजक श्री ललित तनेजा, नाबार्ड पंजाब क्षेत्र के मुख्य महाप्रबंधक श्री वी.के. आर्या तथा नाबार्ड हरियाणा क्षेत्र की मुख्य महाप्रबंधक श्रीमती निवेदिता तिवारी सहित राज्य सरकार एवं बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, एसएलबीसी के समन्वयक, पैक्स, एफपीओ व एनजीओ के प्रतिनिधि, नाबार्ड के अधिकारी एवं कर्मचारी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *