**सिरोमणि अकाली दल (पुनर्सुरजीत) के प्रतिनिधिमंडल ने एसजीपीसी सदस्य अमरजीत सिंह चावला पर लगे आरोपों की एसआईटी (SIT) जांच की मांग को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से की मुलाकात
शिरोमणि अकाली दल (पुनर्सुरजीत) के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से मुलाकात की और एसजीपीसी (SGPC) सदस्य अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने हेतु उनके हस्तक्षेप की मांग की।
पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष करनैल सिंह पीर मोहम्मद, महासचिव देविंदर सिंह सोढ़ी और भूपिंदर सिंह शेखापुर, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की कार्यकारिणी समिति के सदस्य मास्टर मिट्ठू सिंह कानेके तथा एसजीपीसी सदस्य जसवंत सिंह पधौन के शामिल प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने एसजीपीसी सदस्य अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) और उसके बाद के घटनाक्रमों की एक उच्चस्तरीय और निष्पक्ष एसआईटी जांच की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिध मंडल ने कहा, “पिछले कई दिनों से अमरजीत सिंह चावला पर लगे उन गंभीर आरोपों पर चर्चाएं चल रही हैं, जो खालसा पंथ की जन्मस्थली श्री आनंदपुर पवित्र धरती पर विदेश से आई एक महिला से कथित तौर पर अनैतिक तरीकों से किए गए दुष्कर्म से जुड़े हैं। पूरा घटनाक्रम और मीडिया रिपोर्ट कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं, जिनकी उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।”
उन्होंने आगे कहा, “पूरे मामले का सच जनता के सामने लाने के लिए किसी वरिष्ठ, ईमानदार और निष्पक्ष अधिकारी की अगुवाई में विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया जाना चाहिए। यह जांच 15 दिनों के भीतर फास्ट-ट्रैक आधार पर पूरी की जानी चाहिए और जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। एसआईटी को यह जांच करने का जनादेश दिया जाना चाहिए कि उक्त महिला और उसकी बहू को बहरीन से लाने के लिए हवाई टिकटों का प्रबंध किसने किया था।”
प्रतिनिधिमंडल ने आगे कहा, “इसी तरह, नई दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचते ही महिला को धोखाधड़ी के एक मामले में कथित तौर पर गिरफ्तार कर नाभा जेल में बंद कर दिया गया था, जहां उसे कथित तौर पर वीआईपी सुविधाएं मिलीं। इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि जेल में रहने के दौरान क्या उसकी मुलाकात बिक्रम सिंह मजीठिया से हुई थी, जो उस समय वहीं बंद थे। जेल से रिहा होने के बाद महिला को आनंदपुर साहिब स्थित ‘भाई बचित्र सिंह निवास’ में शिफ्ट कर दिया गया था, इसलिए एसआईटी को इसकी जांच करनी चाहिए कि उसे वहां कौन ले गया, किस वाहन का इस्तेमाल हुआ और कौन उसके संपर्क में था।”
प्रतिनिधिमंडल ने बताया, “मीडिया चर्चाओं के अनुसार, शिरोमणि यूथ अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष सर्वजीत सिंह झिंझर ने कथित तौर पर एयर टिकट का इंतजाम किया, जेल से उसकी रिहाई में मदद की और अकाली नेता विरसा सिंह वल्टोहा के साथ उसका संपर्क कराया। निष्पक्ष जांच के जरिए इन दावों की सच्चाई सामने आनी चाहिए। महिला ने आरोप लगाया है कि श्री अकाल तख्त साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी मलकीत सिंह, ड्राइवर मोहन सिंह और मेजर सिंह कवीश्वर ने भी कथित तौर पर उससे फोन पर अनुचित बातचीत की और आपत्तिजनक मैसेज भेजे, जिसकी जांच होनी चाहिए।”
प्रतिनिधिमंडल ने आगे कहा, “इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि लगभग आठ महीने की अवधि के दौरान महिला किस-किस से मिली और एसजीपीसी ने उसे अपने प्रबंधन व देखरेख में क्यों रखा।”
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि तख्त श्री केसगढ़ साहिब के प्रबंधक (मैनेजर) से लेकर ड्यूटी पर मौजूद सेवादारों तक, संबंधित हर व्यक्ति से पूछताछ की जानी चाहिए। इसी तरह, एफआईआर दर्ज होने के बाद यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि अमरजीत सिंह चावला को विदेश जाने में किसने मदद की और किसने उन्हें सुरक्षित रास्ता प्रदान किया।
उन्होंने अंत में कहा, “तख्त श्री केसगढ़ साहिब खालसा पंथ की जन्मस्थली है और इस मामले में लगे आरोपों तथा प्रबंधन की वर्तमान स्थिति ने सिख समुदाय के बीच गहरी चिंता, हैरानी और रोष पैदा कर दिया है। इन घटनाक्रमों ने श्रद्धेय सिख संस्थाओं, विशेष रूप से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब की गरिमा व साख पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस कृत्य से पूरे सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची है, जिसके लिए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है।
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