चंडीगढ़, 18 फरवरी- फरीदाबाद में 38 वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला जहां देश-विदेश के शिल्पकारों के हुनर को विश्वभर में पहचान दिलवा रहा है। वहीं मानव सभ्यता के विकास से जुड़ी संस्कृति को भी पुनर्जीवित कर रहा है। ऐसी ही प्राचीन सभ्यताओं में से झारखंड की सदियों पुरानी सोहराई कला और खोवर चित्रकारी पर्यटकों के मन को मोह रही है। मेला में बनाए गए झारखंड परिसर में शिल्पकारों और चित्रकारों की कला लोगों के मन को मोह रही है।
झारखंड परिसर में अस्थाई दीवारों को सोहराई कला और खोवर चित्रकारी से काफी आकर्षक बनाया है। सोहराई और खोवर भारत के पूर्वी भाग में, विशेष रूप से झारखंड के हजारीबाग जिले में प्रचलित दीवार चित्रकला या भित्ति चित्र की










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