चंडीगढ़, 9 अप्रैल (म्हारा हरियाणा डेस्क): कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. अनिल वशिष्ठ ने कहा कि विद्यार्थियों की भाषण प्रतियोगिता न केवल उनकी प्रतियोगी दक्षता को निखारती है अपितु उनके विभिन्न विषयों पर ज्ञान को भी बढ़ाती है।
प्रो. अनिल वशिष्ठ आज कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित रोस्ट्रम (मंच) प्रतियोगिता के तीसरे चरण के अवसर पर बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। इससे पहले दीप प्रज्ज्वलित, सरस्वती पूजन व केयू के कुलगीत द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
उन्होंने कहा कि भाषा की जानकारी के साथ-साथ अपने संवाद में संवेदनाएं व भाव भी व्यक्त करना एक अच्छे वक्ता की पहचान है। उन्होंने छात्रों को कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में जीतना उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना उस प्रतियोगिता में भाग लेकर सीखना। शब्दों के माध्यम से अपने संवाद को व्यक्त करने की जो कला प्रकृति ने मनुष्य को प्रदान की है वह उसे अन्य जीवों से भिन्न बनाती है। संवाद कला जितनी बारीकी से सीखनी पड़ती है उसी बारीकी से किसी भी विषय पर विस्तारपूर्वक जानकारी का अध्ययन करना पड़ता है।










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