8 जनवरी, 2026 (म्हारा हरियाणा डेस्क): FY2026–27 के लिए भारत के केंद्रीय बजट में रक्षा और पूंजीगत व्यय बढ़ने की संभावना है, क्योंकि सरकार घरेलू और बाहरी दबावों के बीच राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की कोशिश कर रही है। जहां केंद्र 4.3% के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रख सकता है, वहीं वास्तविक घाटा लगभग 4.6% तक पहुंच सकता है। इसकी वजह बुनियादी ढांचा, रेलवे, अनुसंधान एवं विकास और सुरक्षा पर बढ़ता खर्च है।
भू-राजनीतिक चुनौतियों में वृद्धि, खासकर चीन और पाकिस्तान के साथ तनाव, रक्षा आवंटन बढ़ाने की जरूरत को और मजबूत कर रही है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब हाल के वर्षों में रक्षा खर्च कुल व्यय के अनुपात में अपेक्षाकृत स्थिर रहा है। साथ ही, सरकार ऋण-से-जीडीपी अनुपात घटाने के अपने लक्ष्य पर भी कायम है, जो कोविड-19 के दौरान तेजी से बढ़ा था और अभी दीर्घकालिक लक्ष्य से ऊपर है।
कई बड़े प्रस्तावित निवेश—जैसे बहुवर्षीय आरएंडडी फंड और रेलवे पर बड़ा खर्च—सरकारी वित्त पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। वहीं, कर सुधारों और सीमा शुल्क शुल्क के युक्तिकरण के कारण राजस्व जुटाने में भी चुनौतियां आ सकती हैं, जिससे बढ़े हुए खर्च की भरपाई करना कठिन हो सकता है।
कुल मिलाकर, भले ही राजकोषीय समेकन सरकार की प्राथमिकता बना रहे, लेकिन बढ़ती खर्च जरूरतें घाटे को निर्धारित लक्ष्य के भीतर रखना मुश्किल बना सकती हैं।










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